बेजान आईना

बेज़ान आईने का दखल ग़वाऱा नही मुझे मैं केवल खुद को तेरी आँखों में देखना चाहती हुँ 💞😘 💞 👉💞 💞👈 बेहपना मोहबतें –

Sab Fijul Hai

मेरी शायरियों का बस इतना उसूल है . . . तुम वाह ! कहो तो मुकम्मल बर्ना सब फिजूल है !

सांवले रंग पर मत जा गालिब

अरे ओ गालिब सांवले रंग पर मत जा गालिब . . . मैंने दुध से ज्यादा चाय के दिवाने देखे है। 😍☕️😍

न शोहरत की दरकार थी

न शोहरत की दरकार थी न तोहमत से बैर था उम्मीद इतना ही था की वो अपना था गैर न था ~बेबाक इलाहाबादी

सुन लेने से

“सुन लेने से” कितने सारे सवाल सुलझ जाते हैं, “सुना देने से” हम फिर से वही उलझ जाते हैं!

गोरे सूरज ने

फूल जैसे मख़मली तलवों में छाले कर दिए, गोरे सूरज ने हज़ारों जिस्म काले कर दिए। ~राहत इंदौरी

मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए ~अज़हर इक़बाल

हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं

अपनी मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं ~अलीना इतरत

खूबसूरती न सूरत में है

खूबसूरती न सूरत में है… न लिबास में है… निगाहें जिसे चाहे… उसे हसीन कर दें…

किसी ने चाहा भी न होगा तुम्हे

इतना तो किसी ने चाहा भी न होगा तुम्हे, जितना मैंने सिर्फ…… सोचा है तुम्हे