सुन लेने से

“सुन लेने से” कितने सारे सवाल सुलझ जाते हैं, “सुना देने से” हम फिर से वही उलझ जाते हैं!

गोरे सूरज ने

फूल जैसे मख़मली तलवों में छाले कर दिए, गोरे सूरज ने हज़ारों जिस्म काले कर दिए। ~राहत इंदौरी

मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए ~अज़हर इक़बाल

हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं

अपनी मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं ~अलीना इतरत

खूबसूरती न सूरत में है

खूबसूरती न सूरत में है… न लिबास में है… निगाहें जिसे चाहे… उसे हसीन कर दें…

किसी ने चाहा भी न होगा तुम्हे

इतना तो किसी ने चाहा भी न होगा तुम्हे, जितना मैंने सिर्फ…… सोचा है तुम्हे

जो मुझे बस खोने से डरता हो

कोई ऐसा सख्श मुझे भी दे… ऐ मौला.. जो मुझे बस खोने से डरता हो…!!!

न ज़ख्म भरे, न शराब सहारा हुई.

न ज़ख्म भरे, न शराब सहारा हुई., न वो वापस लौटीं, न मोहब्बत दोबारा हुई..

तुमने तो फिर भी सीख लिए दुनिया के चाल चलन

तुमने तो फिर भी सीख लिए दुनिया के चाल चलन… हम तो कुछ भी ना कर सके बस मुहब्बत के सिवा !!

कभी हमसे भी पूछ लिया करो हाल-ए-दिल

“कभी हमसे भी पूछ लिया करो हाल-ए-दिल, कभी हम भी तो कह सकें दुआ है आपकी”