जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आजमाये गये

जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आजमाये गये, जुल्म भी सहा हमने, और जालिम भी कहलाये गये!!

जब कभी दर्द की तस्वीर बनाने निकले

जब कभी दर्द की तस्वीर बनाने निकले ज़ख़्म की तह में कई ज़ख़्म पुराने निकले ~अहया भोजपुरी

जब भी खोला है ये माज़ी का दरीचा मैं ने

जब भी खोला है ये माज़ी का दरीचा मैं ने कोई तस्वीर ख़यालों में नज़र आती है ~फ़रह इक़बाल

मिलता  सुकून  भरता तुझे पहलू में

काश अठखेलियां लेता कभी तेरे प्यार से उफनते सागर में रोम रोम हर्षित हो जाता तब मिलता सुकून भरता तुझे पहलू में

काश भीगता कभी तू

काश भीगता कभी तू मेरे सुखन की बारिश में। कतरा – कतरा जज़्बात, तेरी जड़ों में रिस जाते।।

मौत आने के पहले ही मार देती है

कुछ गम, कुछ ठोकरें, कुछ चीखें उधार देती है। कभी-कभी जिंदगी, मौत आने के पहले ही मार देती है।।

नफरत से तो तुफान भी हार गए मुझे बुझाने में

कोई प्यार से जरा सी फुंक मार दे तो बुझ जाऊं…..!! नफरत से तो तुफान भी हार गए मुझे बुझाने में…. -अज्ञात 😊🙏

इश्क़ रहा होगा, यूं ही कोई जज़्बाती नहीं होता

बहुत रोयी वो उस शख़्स के जाने से इश्क़ रहा होगा, यूं ही कोई जज़्बाती नहीं होता

मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता

बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता ~अफ़ज़ल ख़ान

और भी बहुत रंग हैं मोहब्बत के

इश्क़ में क्या तुम और क्या मैं आप ही रूठिये, आप ही मानिये और भी बहुत रंग हैं मोहब्बत के हरेक आज़माइये, हरेक जानिये