सुन लेने से

“सुन लेने से” कितने सारे सवाल सुलझ जाते हैं, “सुना देने से” हम फिर से वही उलझ जाते हैं!

उधार है तुम पर

कुछ मुलाकाते उधार है तुम पर.. इस कर्ज को भी अपनी डायरी में दर्ज कर लेना.. 😉😍

छम-छम की आवाज़ आती है

पायल बेचकर उसने लगवाए थे मेरे गिटार में नए तार अब तारों को छेड़ता हूँ तो छम-छम की आवाज़ आती है

ये तो जुल्म है ना

Dear #Soulmate लाजमी तो नहीं, मुझे हर वक़्त याद करो… बिल्कुल ही भूल जाओ, ये तो जुल्म है ना…!!!

गुलज़ार साहब की नज़्म हो जैसे

उसकी आँखें गुलज़ार साहब की नज़्म हो जैसे… उसकी बातें जैसे क़ैफ़ी आज़मी की ‘तेरी ख़ुशबू में बसे ख़त’…

स्कूल का वो बस्ता मुझे फिर से थमा दे माँ

स्कूल का वो बस्ता मुझे फिर से थमा दे माँ, . . . . ये ज़िन्दगी का सफर मुझे बड़ा मुश्किल लगता हैं!

तपते बदन पर

तपते बदन पर भींगा रुमाल रखती है मां कितनी शिद्दत से मेरा ख्याल रखती है हैप्पी मदर्स डे

ऊपर जिसका अंत नहीं

ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमां कहते हैं , जहाँ में जिसका अंत नहीं उसे माँ कहते हैं।

दरिया अगर सूख भी जाये

कैसे भूलेगी वो मेरी बरसोंकी चाहत को… . . . . दरिया अगर सूख भी जाये तो रेत से नमी नहीं जाती…

कसम मेरे नाम की

हर रोज़ खा जाते थे वो कसम मेरे नाम की, . . . आज पता चला की जिंदगी धीरे धीरे ख़त्म क्यूँ हो रही है.