दिसम्बर की ये आखिरी शामें

लिपट लिपट कर कह रही हैं, दिसम्बर की ये आखिरी शामें, . . . अलविदा कहने से पहले एक बार गले तो लगा लो…!

ये दिसम्बर भी बीतेगा

ये दिसम्बर भी बीतेगा पिछले साल की तरह, . . . इसे भी तुम्हारी तरह रुकने की आदत नहीं।

ए नसीब ज़रा एक बात तो बता

ए नसीब ज़रा एक बात तो बता… . . . तू सबको आज़माता है या मुझसे ही दुश्मनी है!

इश्क का धंधा

इश्क का धंधा बड़ा ही गन्दा.. . . . मुनाफे में “जेब” जले.. और घाटे में “दिल”

ऐ दिल थोड़ी हिम्मत रख

Aye dil thodi himmat Rakh dono mil kar Use bhula denge.

राजनीतिक प्रपोजल

राजनीतिक प्रपोजल नियंत्रण रेखा पार कर गया है तेरा इश्क़ . . . . . दिल अब द्विपक्षीय वार्ता करना चाहता है !!

एक बार इश्क़ हो जाने दो

एक बार इश्क़ हो जाने दो हमको भी… . . . फिर शायरियां चेप चेप कर कलेजा ना फाड़ दिया तो कहना…😂 😂😂😂😂😂

बेजान आईना

बेज़ान आईने का दखल ग़वाऱा नही मुझे मैं केवल खुद को तेरी आँखों में देखना चाहती हुँ 💞😘 💞 👉💞 💞👈 बेहपना मोहबतें –

दिल से भी बहरा था

हम उसको सुनाते रहे गम की कहानियां। जो शख्स कान से ही नही दिल से भी बहरा था

काग़ज़ का बदन

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन , . . . दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ।। ~राहत इंदौरी