किसी को चाहना तो

किसी को चाहना तो इतनी शिद्दत से चाहना की उसके जाने के बाद तुम्हारी कविताएँ मोहताज न रहें किसी समीक्षक की किसी प्रशंसक की…. ~ रचित दीक्षित

बिना जिस्म को छुए

बिना जिस्म को छुए कोई रूह से लिपट जाए… . . . मेरे ख्याल में तो वही सच्चा इश्क़ है..

गलतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही

गलतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही, दोनों इंसान हैं, खुदा तू भी नही, मैं भी नहीं तू मुझे औऱ मैं तुझे इल्जाम देते हैं मगर, अपने अंदर झाँकता तू भी नही, मैं भी नही गलतफमियों ने कर दी दोनो मे पैदा दूरियां वरना बुरा तूभी नही, मैं …

जब नारी किसी नर से कहे

सुन रहे हो प्रिय? तुम्हें मैं प्यार करती हूँ। और जब नारी किसी नर से कहे, प्रिय! तुम्हें मैं प्यार करती हूँ, तो उचित है, नर इसे सुन ले ठहर कर, प्रेम करने को भले ही वह न ठहरे। ~ दिनकर (‘उर्वशी’ से)

तुम दिल्ली की इठलाती मेट्रो

तुम दिल्ली की इठलाती मेट्रो मैं कलकत्ते का सहमा ट्राम प्रिये तुम अंग्रेजी की पॉपुलर लेक्चरर मैं हिंदी का लेखक गुमनाम प्रिये

जब प्रेम का इज़हार करेंगे

जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम हमारी कोई भी महान उपलब्धि काम नहीं आएगी काम आएगा सिर्फ़ स्त्री के क़दमों में बैठ काँपते हाथों से फूल देना

मोहब्बत अपने अंजाम पर कब पहुँचती है

भक्त – बाबा मोहब्बत अपने अंजाम पर कब पहुँचती है . . . . . . . . . . . बाबा ‐ जब कमरे की व्यवस्था हो जाती है 😂🙈😂🙈😂🙈😂🙈😂🙈😂🙈😂

मर जाये वो मजबूरियाँ

काश मर जाये वो मजबूरियाँ, . . . . . . जिनकी वजह से तुम मुझसे दूर हो !! 😐☹️☹️☹️

इश्क में रूठना एक अदा है

इश्क में रूठना एक अदा है, पर रूठकर दूरी बनाना…. एक इशारा, किसी से रूठ कर आप उनसे दूरी बनाते हो, तो आप उन्हें परोक्ष रूप में इशारा रहे हो, के “मैं ऐसे ही खुश हूं” ….!! 💛

मेरे इश्क का वजूद

कभी लफ़्ज़ों में मत ढूँढना… मेरे इश्क का वजूद… . . मैं उतना नहीं लिख पाता… जितना महसूस करता हुँ…