शौक था कभी पढ़ने का उन्हें

शौक था कभी पढ़ने का उन्हें जिन्हे पढ़ कर सभी छोड़ दिया करते थे
आज छोड़ रहे है वो मेहताब उन्हें
जो छोड़ी चीज को खुशी से जोड़ दिया करते थे

Attitude

समझ नहीं आता कि
लड़कियों में ऐसी क्या कमी है

जो वो खुद को मेरे लायक नहीं समझती…
😜😜😂😂😂😂

भाई कितनी भी पढ़ाई कर लो

भाई कितनी भी पढ़ाई कर लो, डिग्री-विग्रीयाँ ले लो… लेकिन रेस्टोरेंट के दरवाजे पर Push और Pull लिखा देखते हो तो .

2-3 Second के लिये सोचना पड़ता है, कि साला धकेलना है, कि खिंचना है…😂😂😂😋😋😋

ख्वाहिशे दफ़न करे या चादर बड़ी करें

ये कश्मकश है ज़िंदगी की
कि कैसे बसर करें ……

ख्वाहिशे दफ़न करे
या चादर बड़ी करें ….

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दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था

दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था|
तुम्हारे घर का सफ़र इस क़दर सख्त न था।

इतने मसरूफ़ थे हम जाने के तैयारी में,
खड़े थे तुम और तुम्हें देखने का वक्त न था।

– गोपालदास नीरज