किसी को चाहना तो

किसी को चाहना तो
इतनी शिद्दत से चाहना की
उसके जाने के बाद
तुम्हारी कविताएँ
मोहताज न रहें
किसी समीक्षक की
किसी प्रशंसक की….

~ रचित दीक्षित

जब नारी किसी नर से कहे

सुन रहे हो प्रिय?
तुम्हें मैं प्यार करती हूँ।
और जब नारी किसी नर से कहे,
प्रिय! तुम्हें मैं प्यार करती हूँ,
तो उचित है, नर इसे सुन ले ठहर कर,
प्रेम करने को भले ही वह न ठहरे।

~ दिनकर (‘उर्वशी’ से)

जब प्रेम का इज़हार करेंगे

जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम
हमारी कोई भी महान उपलब्धि
काम नहीं आएगी

काम आएगा सिर्फ़
स्त्री के क़दमों में बैठ
काँपते हाथों से फूल देना

मोहब्बत अपने अंजाम पर कब पहुँचती है

भक्त – बाबा मोहब्बत अपने अंजाम पर कब पहुँचती है
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बाबा ‐ जब कमरे की व्यवस्था हो जाती है
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इश्क में रूठना एक अदा है

इश्क में रूठना एक अदा है,
पर रूठकर दूरी बनाना…. एक इशारा,

किसी से रूठ कर आप उनसे दूरी बनाते हो,
तो आप उन्हें परोक्ष रूप में इशारा रहे हो,
के “मैं ऐसे ही खुश हूं” ….!!

💛

सींचते रहना ही प्रेम है

कहीं पढ़ा था-

“बो देना प्रेम नहीं है।
उग आना प्रेम है”

और मैं कह आया–
“बो देना या फिर उग आना
प्रेम है या नहीं
ये तो मैं नहीं जानता।

बस इतना जानता हूँ
उस उग आये
पौध को
सींचते रहना ही प्रेम है!”

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