गिरने वाले उस मकान में भी एक सलीक़ा था

गिरने वाले उस मकान में भी एक सलीक़ा था . . . तुम ईंटों कि बात करते हो , मिट्टी भी साथ साथ गिरी

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा और उसे तेल में डुबाकर दिया में सजाऊँगा फिर संसार के सबसे ऊंचे पर्वत पर जाकर मैं उस दीये को जलाऊँगा कविता में कुछ हो न हो उजाला जरूर होना चाहिए बस इतना उजाला जो अंधेरा हर सके। ~ देवेंद्र

तुम दिल्ली की इठलाती मेट्रो

तुम दिल्ली की इठलाती मेट्रो मैं कलकत्ते का सहमा ट्राम प्रिये तुम अंग्रेजी की पॉपुलर लेक्चरर मैं हिंदी का लेखक गुमनाम प्रिये

बदल जाऊं तो मेरा नाम वक्त रखना

बदल जाऊं तो मेरा नाम वक्त रखना, थम जाऊं तो हालात, . . छलक जाऊं तो मुझे जज्बात कहना.. महसूस हो जाऊं तो दोस्त राज़ #बज़्म

जिस से मुकद्दर नही मिलता

मिलने की तरह वो मुझसे पल भर नही मिलता दिल भी मिला तो उस से मिला जिस से मुकद्दर नही मिलता

एक बार इश्क़ हो जाने दो

एक बार इश्क़ हो जाने दो हमको भी… . . . फिर शायरियां चेप चेप कर कलेजा ना फाड़ दिया तो कहना…😂 😂😂😂😂😂

बेजान आईना

बेज़ान आईने का दखल ग़वाऱा नही मुझे मैं केवल खुद को तेरी आँखों में देखना चाहती हुँ 💞😘 💞 👉💞 💞👈 बेहपना मोहबतें –

मेरा रिश्ता है बरसात से क्या

वास्ता हुस्न से या शिद्दत ए जज्बात से क्या इश्क को तेरे कबीले या मेरी जात से क्या प्यास देखूं या करूँ फिक्र कि घर कच्चा है सोच में हूँ कि मेरा रिश्ता है बरसात से क्या..! (जौन एलिया)

दिल से भी बहरा था

हम उसको सुनाते रहे गम की कहानियां। जो शख्स कान से ही नही दिल से भी बहरा था

काग़ज़ का बदन

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन , . . . दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ।। ~राहत इंदौरी