मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा और उसे तेल में डुबाकर दिया में सजाऊँगा फिर संसार के सबसे ऊंचे पर्वत पर जाकर मैं उस दीये को जलाऊँगा कविता में कुछ हो न हो उजाला जरूर होना चाहिए बस इतना उजाला जो अंधेरा हर सके। ~ देवेंद्र

कुछ लोग अपनें लम्हें सँवारने के लिए

कुछ लोग अपनें लम्हें सँवारने के लिए . . . . दूसरों की सदियाँ वीरान कर देते हैं

मुझे पसंद हैं

मुझे पसंद हैं धूसर कत्थई होंठ बिन काजल बड़ी आंखें पसीने से धुला चमकता चेहरा ख़ुश्क लहराते बाल सादे कपड़े भोली बातें क्योंकि मैं देह से परे रहकर तुम्हारी आत्मा को चूमना चाहता हूं ।

मोहब्बत से भी गहरी होती है

ना चाहते हुए भी छोड़ना पड़ता है … . . . . कुछ मजबूरियां , मोहब्बत से भी गहरी होती है ,

Dur Rahakar Bhi

सुनो दूर रहकर भी तुम्हारी हर खबर रखते हैं ….😎 . . . हम तुम्हें अपने करीब कुछ इस कदर रखते हैं….!!!😘

Na Khubsurat

ना खूबसूरत… ना अमीर… ना शातिर बनाया था. . . मेरे खुदा ने तो मुझे तेरे खातिर बनाया था..😐

Talash

कहाँ तलाश करोगे मेरे जैसे इंसान को जो तुमसे जुदा भी रहे और बेइंतहा प्यार भी करे

Jab Jarurat Ho

जब जरूरत हो तभी याद करना इसको मोहब्बत नही खुदगर्जी कहते है

Teri Yaad Jyada Aati Hai

आज कल रातों में नींद काम और तेरी याद ज्यादा आती है

Bichhad Jayen To Yaaden Lambi

बहुत अजीब होते है ये प्यार के रिश्ते भी मिल जाएं तो बातें लंबी बिछड़ जाए तो यादें लंबी