इश्क का धंधा

इश्क का धंधा बड़ा ही गन्दा.. . . . मुनाफे में “जेब” जले.. और घाटे में “दिल”

अक्टूबर बिछड़ने का महीना है

अक्टूबर बिछड़ने का महीना है, शाख़ से पत्ते अलग हुए जा रहे हैं, हवाओं के दिल भी भारी हो रखे हैं, पर अक्टूबर उम्मीद का महीना भी है कि नंगी टहनियां फ़िर से हरी होंगी, सब ख़त्म हो जाने के बाद भी कुछ होना बचा रहेगा.. और बचा रहेगा मेरा …

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा और उसे तेल में डुबाकर दिया में सजाऊँगा फिर संसार के सबसे ऊंचे पर्वत पर जाकर मैं उस दीये को जलाऊँगा कविता में कुछ हो न हो उजाला जरूर होना चाहिए बस इतना उजाला जो अंधेरा हर सके। ~ देवेंद्र

कुछ लोग अपनें लम्हें सँवारने के लिए

कुछ लोग अपनें लम्हें सँवारने के लिए . . . . दूसरों की सदियाँ वीरान कर देते हैं

मुझे पसंद हैं

मुझे पसंद हैं धूसर कत्थई होंठ बिन काजल बड़ी आंखें पसीने से धुला चमकता चेहरा ख़ुश्क लहराते बाल सादे कपड़े भोली बातें क्योंकि मैं देह से परे रहकर तुम्हारी आत्मा को चूमना चाहता हूं ।

मोहब्बत से भी गहरी होती है

ना चाहते हुए भी छोड़ना पड़ता है … . . . . कुछ मजबूरियां , मोहब्बत से भी गहरी होती है ,

Dur Rahakar Bhi

सुनो दूर रहकर भी तुम्हारी हर खबर रखते हैं ….😎 . . . हम तुम्हें अपने करीब कुछ इस कदर रखते हैं….!!!😘

Na Khubsurat

ना खूबसूरत… ना अमीर… ना शातिर बनाया था. . . मेरे खुदा ने तो मुझे तेरे खातिर बनाया था..😐

Talash

कहाँ तलाश करोगे मेरे जैसे इंसान को जो तुमसे जुदा भी रहे और बेइंतहा प्यार भी करे