तुम इश्क करो और दर्द न हो

तुम इश्क करो और दर्द न हो, . . . मतलब दिस्मबर की रात हो और सर्द न हो…!!!

वही दिलकश दिसम्बर है

फिर से तेरी यादों का मेरे दिल में बबंडर है…!! . . . . वही मौसम, वही सर्दी, वही दिलकश दिसम्बर है…!!

पहली मोहब्बत की बददुआ ना लगे

हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे…. . . . . के तुमको पहली मोहब्बत की बददुआ ना लगे…

दिसम्बर की ये आखिरी शामें

लिपट लिपट कर कह रही हैं, दिसम्बर की ये आखिरी शामें, . . . अलविदा कहने से पहले एक बार गले तो लगा लो…!

ये दिसम्बर भी बीतेगा

ये दिसम्बर भी बीतेगा पिछले साल की तरह, . . . इसे भी तुम्हारी तरह रुकने की आदत नहीं।

इश्क का धंधा

इश्क का धंधा बड़ा ही गन्दा.. . . . मुनाफे में “जेब” जले.. और घाटे में “दिल”

एक बार इश्क़ हो जाने दो

एक बार इश्क़ हो जाने दो हमको भी… . . . फिर शायरियां चेप चेप कर कलेजा ना फाड़ दिया तो कहना…😂 😂😂😂😂😂

बेजान आईना

बेज़ान आईने का दखल ग़वाऱा नही मुझे मैं केवल खुद को तेरी आँखों में देखना चाहती हुँ 💞😘 💞 👉💞 💞👈 बेहपना मोहबतें –

दिल से भी बहरा था

हम उसको सुनाते रहे गम की कहानियां। जो शख्स कान से ही नही दिल से भी बहरा था

काग़ज़ का बदन

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन , . . . दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ।। ~राहत इंदौरी