थके लोगों को मजबूरी में चलते देख लेता हूँ

थके लोगों को मजबूरी में चलते देख लेता हूँ
मैं बस की खिड़कियों से ये तमाशे देख लेता हूँ

~मुनीर नियाज़ी

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