काग़ज़ का बदन

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन , . . . दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ।। ~राहत इंदौरी

जो ये दीवार का सुराख है साज़िश का हिस्सा है

जो ये दीवार का सुराख है साज़िश का हिस्सा है मगर हम इसे अपने घर का रोशन दान कहते है.. #राहत_इंदौरी

जो दुनिया में सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी

जो दुनिया में सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं! #राहतइंदौरी

राह में खतरे भी हैं लेकिन ठहरता कौन है

राह में खतरे भी हैं लेकिन ठहरता कौन है. मौत कल आती है आज आ जाए डरता कौन है. तेरे लश्कर के मुक़ाबिल में अकेला हूँ मगर फैसला मैदान में होगा के मरता कौन है…. – राहत इंदौरी