बैठे चाय की प्याली लेकर पुराने किस्से याद करने…
चाय ठंडी होती गई और किस्से गरम होते गये !!
कुछ जवाब तेरी-मेरी
रहने दे कुछ बाते…..
यूँ ही अनकही सी..
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कुछ जवाब तेरी-मेरी …
ख़ामोशी में अटके ही अच्छे हैं.
दरिया अगर सूख भी जाये
कैसे भूलेगी वो मेरी बरसोंकी चाहत को…
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दरिया अगर सूख भी जाये तो रेत से नमी नहीं जाती…
रिश्तों से भरोसा
नजाकत तो देखिये, की सूखे पत्ते ने डाली से कहा ..
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चुपके से अलग करना वरना लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा….
जो हासिल ना हो सका
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में….
बस हम गिनती उसी की करते है,
जो हासिल ना हो सका….