इश्क़ की किताब का उसुल

इश्क़ की किताब का उसुल है जनाब………….!! . . . मुड़ कर देखोगे… तो मोहब्बत मानी जाएगी………!! 😂😂😂😂😂

इश्क़ जब गहरा हो जाए

सुना है इश्क़ जब गहरा हो जाए तो आशिकों के चेहरे मिलने लगते हैं। ये तो बताओ.. तुम्हारे गालों पर भी भंवर पड़ते हैं क्या?

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा और उसे तेल में डुबाकर दिया में सजाऊँगा फिर संसार के सबसे ऊंचे पर्वत पर जाकर मैं उस दीये को जलाऊँगा कविता में कुछ हो न हो उजाला जरूर होना चाहिए बस इतना उजाला जो अंधेरा हर सके। ~ देवेंद्र

बिना जिस्म को छुए

बिना जिस्म को छुए कोई रूह से लिपट जाए… . . . मेरे ख्याल में तो वही सच्चा इश्क़ है..

जब नारी किसी नर से कहे

सुन रहे हो प्रिय? तुम्हें मैं प्यार करती हूँ। और जब नारी किसी नर से कहे, प्रिय! तुम्हें मैं प्यार करती हूँ, तो उचित है, नर इसे सुन ले ठहर कर, प्रेम करने को भले ही वह न ठहरे। ~ दिनकर (‘उर्वशी’ से)

जब प्रेम का इज़हार करेंगे

जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम हमारी कोई भी महान उपलब्धि काम नहीं आएगी काम आएगा सिर्फ़ स्त्री के क़दमों में बैठ काँपते हाथों से फूल देना

इश्क में रूठना एक अदा है

इश्क में रूठना एक अदा है, पर रूठकर दूरी बनाना…. एक इशारा, किसी से रूठ कर आप उनसे दूरी बनाते हो, तो आप उन्हें परोक्ष रूप में इशारा रहे हो, के “मैं ऐसे ही खुश हूं” ….!! 💛

मेरे इश्क का वजूद

कभी लफ़्ज़ों में मत ढूँढना… मेरे इश्क का वजूद… . . मैं उतना नहीं लिख पाता… जितना महसूस करता हुँ…

तुम्हारा वक़्त चाहिए

मुझे तुम्हारी चालाकी नही तुम्हारा हुनर चाहिए.. . . . मुझे तोहफे में घड़ी नही तुम्हारा वक़्त चाहिए…

छुप कर गुनाह करते हैं

बड़ी सादगी से देख लेते हैं तेरी तस्वीर को …. शरीफ़ लोग हैं . . छुप कर गुनाह करते हैं …