जब प्रेम का इज़हार करेंगे

जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम हमारी कोई भी महान उपलब्धि काम नहीं आएगी काम आएगा सिर्फ़ स्त्री के क़दमों में बैठ काँपते हाथों से फूल देना

इश्क में रूठना एक अदा है

इश्क में रूठना एक अदा है, पर रूठकर दूरी बनाना…. एक इशारा, किसी से रूठ कर आप उनसे दूरी बनाते हो, तो आप उन्हें परोक्ष रूप में इशारा रहे हो, के “मैं ऐसे ही खुश हूं” ….!! 💛

मेरे इश्क का वजूद

कभी लफ़्ज़ों में मत ढूँढना… मेरे इश्क का वजूद… . . मैं उतना नहीं लिख पाता… जितना महसूस करता हुँ…

तुम्हारा वक़्त चाहिए

मुझे तुम्हारी चालाकी नही तुम्हारा हुनर चाहिए.. . . . मुझे तोहफे में घड़ी नही तुम्हारा वक़्त चाहिए…

छुप कर गुनाह करते हैं

बड़ी सादगी से देख लेते हैं तेरी तस्वीर को …. शरीफ़ लोग हैं . . छुप कर गुनाह करते हैं …

सींचते रहना ही प्रेम है

कहीं पढ़ा था- “बो देना प्रेम नहीं है। उग आना प्रेम है” और मैं कह आया– “बो देना या फिर उग आना प्रेम है या नहीं ये तो मैं नहीं जानता। बस इतना जानता हूँ उस उग आये पौध को सींचते रहना ही प्रेम है!”

जब भी नाराज़ होती है

वो अपनी नाराजगी कुछ यूँ जाहिर करती है जब भी नाराज़ होती है #तुम से #आप कहने लगती है 😍 💞

मुझे पसंद हैं

मुझे पसंद हैं धूसर कत्थई होंठ बिन काजल बड़ी आंखें पसीने से धुला चमकता चेहरा ख़ुश्क लहराते बाल सादे कपड़े भोली बातें क्योंकि मैं देह से परे रहकर तुम्हारी आत्मा को चूमना चाहता हूं ।

वो आ गए

माँ आ गयी बाद में बात करते हैं से लेकर … . . . . माँ “वो आ गए ” बाद में बात करते है तक का सफर ही इश्क़ है ….

प्रेम मेरे लिए वह अंतहीन यात्रा है

प्रेम मेरे लिए वह अंतहीन यात्रा है जिसका कोई लक्ष्य नहीं!तुम भी नहीं!! . . . तुम तो वह सहयात्री हो जिसका हाथ पकड़ मैं इस शाश्वत यात्रा पर निकलना चाहता हूँ!!!