Category: कविता

अगले जन्म मैं

अगले जन्म मैं तुम्हें
प्रेयसी नहीं
भिक्षुणी बनकर मिलूँगी
एकदम खाली हाथ

मैंने मुट्ठी भर-भर
तुम्हें जो सर्वस्व दिया है
क्या तब तुम अंजुरी भर
डालोगे मेरी झोली में?

-समृद्धि

तुम कहते हो प्रेम भाषा नहीं जानता

आँखों की अभिव्यक्ति
संसार की श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति है..

आलिंगन संसार की सर्वोत्तम
चिकित्सा पद्धति है…

स्पर्श से बेहतर
कोई अनुवाद नहीं..

चुम्बन से सर्वोच्च
कोई अनुभूति नहीं…

और तुम कहते हो
प्रेम भाषा नहीं जानता..

~ हर्षिता पंचारिया

भूख इन्सान को ग़द्दार बना देती है

तन की हवस मन को गुनहगार बना देती है
बाग के बाग़ को बीमार बना देती है
भूखे पेटों को देशभक्ति सिखाने वालो
भूख इन्सान को ग़द्दार बना देती है

~ गोपालदास “नीरज”

बिस्तर के जूठन होने का

घर में पति की जूठन खाने वाली
स्त्रियां, चीखती है मन ही मन में
जब होता है अहसास उसे,
बिस्तर के जूठन होने का…!!

वें सहम कर हट जाती है पीछे
औऱ झोंक देती है मन को,
रसोई के चूल्हें में..!!

💛💙

प्यार जताने के बहुत मार्ग हैं

चूम लेते
किसी खिलते हुए फूल को!
या सहला देते
किसी पेड़ की पीठ!

कर देते
थोड़ी सी गिदगिलियां
बूढ़की दादी को!
या पास बैठकर
सुन लेते कोई पुराना किस्सा
चुपचाप बैठे दादाजी से!

प्यार पाने के
प्यार जताने के
कितने मार्ग हैं मित्र
और तुम उदास बैठे हो!

~ नरेश गुर्जर

एक दिया

एक दिया सीमा के रक्षक,
अपने वीर जवानों का.

एक दिया मानवता-रक्षक,
चंद बचे इंसानों का.

एक दिया विश्वास दे उनको,
जिनकी हिम्मत टूट गयी.

एक दिया उस राह में भी हो,
जो कल पीछे छूट गयी.

एक दिया जो अंधकार का,
जड़ के साथ विनाश करे.

एक दिया ऐसा भी हो,
जो भीतर तलक प्रकाश करे.

एक दिया सादा हो इतना,
जैसे साधु का जीवन.

एक दिया इतना सुन्दर हो,
जैसे देवों का उपवन.

एक दिया जो भेद मिटाए,
क्या तेरा क्या मेरा है.

एक दिया जो याद दिलाये,
हर रात के बाद सवेरा है.

एक दिया उनकी खातिर हो,
जिनके घर में दिया नहीं.

#Diwali #HappyDiwali

आओ फिर से दिया जलाएँ

भरी दुपहरी में अँधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल
वर्त्तमान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

~ अटल बिहारी वाजपेयी

#Deepavali #MannKiBaat

दिया जला देना मेरे मन

एक तमन्ना की तुलसी पर
इक रस्मों की रंगोली पर
इक अपनेपन के आँगन में
एक कायदों की डोली पर
ख्वाब देखती खिड़की पर
इक खुले ख़यालों की छत पर भी
एक सब्र की सीढ़ी ऊपर
इक चाहत की चौखट पर भी

-राज जैन

उद्दंड लड़के प्रेम में पड़कर शांत हो जाते हैं

कक्षा के सबसे
उद्दंड लड़कों को
कक्षा की सबसे
शांत लड़कियों से
प्रेम होता है

सबसे शांत लड़कियाँ
प्रेम में पड़कर
उद्दंड हो जाती हैं
सबसे उद्दंड लड़के
प्रेम में पड़कर
शांत हो जाते हैं

~ देवेंद्र दांगी

मुझे जीवन में इतना करना है

मुझे जीवन में इतना करना है
कि जब मैं मरूँ तो
संसार में उत्सव हो
मैं शोक का सारथी बनना नहीं चाहता
मेरी मृत्यु पर नन्हे-नन्हे
बालकों को दिए जाएँ दो-दो लड्डू
सुहागिनों को दिया जाए सिंगार का सामान
बुज़ुर्गों को बाँटी जाए लाठी
मेरी पत्नी को कुछ न दिया जाए
बस दी जाए इतनी इजाज़त
कि वह बालों में अनवरत सिंदूर भर सके
मैं किसी तारे की पीठ पर
बैठकर उसे निहारता रहूँगा।

~ देवेंद्र दांगी

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