मोहब्बत अपने अंजाम पर कब पहुँचती है

भक्त – बाबा मोहब्बत अपने अंजाम पर कब पहुँचती है
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बाबा ‐ जब कमरे की व्यवस्था हो जाती है
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महोब्बत लिबास नही जो हर रोज़ बदला जाए

महोब्बत लिबास नही जो हर रोज़ बदला जाए
महोब्बत कफ़न है पहन कर उतारा नही जाता
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