जब थामा था हाथ तेरा पहली बार

जब थामा था हाथ तेरा पहली बार… . . . लगा जैसे किसी ने सर्दी में ठिठुरते हाथों में चाय कि प्याली दे दी हो 💓💓💓💓

बहुत प्यार आता है तुम पर

मैंने कहा बहुत प्यार आता है तुम पर . . . . वो मुस्कुरा कर बोले और तुम्हे आता ही क्या है।

तुझे मुफ़्त में जो मिल गये हम

तुझे मुफ़्त में जो मिल गये हम . . . तू क़दर ना करें ये तेरा हक़ बनता है… .

अगले जन्म मैं

अगले जन्म मैं तुम्हें प्रेयसी नहीं भिक्षुणी बनकर मिलूँगी एकदम खाली हाथ मैंने मुट्ठी भर-भर तुम्हें जो सर्वस्व दिया है क्या तब तुम अंजुरी भर डालोगे मेरी झोली में? -समृद्धि

इश्क़ जब गहरा हो जाए

सुना है इश्क़ जब गहरा हो जाए तो आशिकों के चेहरे मिलने लगते हैं। ये तो बताओ.. तुम्हारे गालों पर भी भंवर पड़ते हैं क्या?

तलाश उनकी हैं

चेहरा खूबसूरत हैं तो आशिक़ों की कमी नहीं . . . . तलाश उनकी हैं जो झुर्रियों को भी दिल से चूमे

मुझे जीवन में इतना करना है

मुझे जीवन में इतना करना है कि जब मैं मरूँ तो संसार में उत्सव हो मैं शोक का सारथी बनना नहीं चाहता मेरी मृत्यु पर नन्हे-नन्हे बालकों को दिए जाएँ दो-दो लड्डू सुहागिनों को दिया जाए सिंगार का सामान बुज़ुर्गों को बाँटी जाए लाठी मेरी पत्नी को कुछ न दिया …

तुम दिल्ली की इठलाती मेट्रो

तुम दिल्ली की इठलाती मेट्रो मैं कलकत्ते का सहमा ट्राम प्रिये तुम अंग्रेजी की पॉपुलर लेक्चरर मैं हिंदी का लेखक गुमनाम प्रिये

जब प्रेम का इज़हार करेंगे

जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम हमारी कोई भी महान उपलब्धि काम नहीं आएगी काम आएगा सिर्फ़ स्त्री के क़दमों में बैठ काँपते हाथों से फूल देना

मेरे इश्क का वजूद

कभी लफ़्ज़ों में मत ढूँढना… मेरे इश्क का वजूद… . . मैं उतना नहीं लिख पाता… जितना महसूस करता हुँ…