कुछ जवाब तेरी-मेरी

रहने दे कुछ बाते….. यूँ ही अनकही सी.. . . . कुछ जवाब तेरी-मेरी … ख़ामोशी में अटके ही अच्छे हैं.

तेरी ख़ामोशी

कौन कहता है की दिल.. सिर्फ लफ्जों से दुखाया जाता है, तेरी ख़ामोशी भी कभी कभी.. आँखें नम कर देती है..

ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं

चलो अब जाने भी दो..क्या करोगे दासता सुनकर.., ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं,और बयां हमसे होगी नहीं…