एक अबोध बालक

तमाम प्रेम कविताओं
और
तरल सम्वेदनाओं के बावजूद
नहीं पकड़ पाए वो रंग
जिसमें डूब
एक अबोध बालक
बिल्ली के अक्ष्म बच्चे को
सहलाता है
छुप कर पालता है
और
उचित समय
दूर कहीं पेड़ के नीचे सुरक्षित छोड़
निर्लप्त चला आता है

फिर से कहीं और प्रेम बाँटने के लिए…

वो जवाब जो मुझे आज तक न मिल सका

वो जवाब जो मुझे आज तक न मिल सका
उसी जवाब का सवाल नहीं करूंगी मैं
अब तुम ख़ूब चैन से सो सकते हो
अब छोटी बातों पे बवाल नहीं करुँगी मैं !