उसकी मोहब्बतों का कैसे हिसाब हो

उसकी मोहब्बतों का कैसे हिसाब हो, . . . जो गले लग कर कहे तुम बहुत खराब हो।

सिर्फ तेरा साथ चाहिये

काश तुम पूछो की मुझसे क्या चाहिये, मैं पकडू बस तेरा हाथ और कहूँ सिर्फ तेरा साथ चाहिये…

हर बात तुम्हारी अच्छी हैं

मैं तुमसे बेहतर लिखता हूँ पर जज्बात तुम्हारे अच्छे हैं मैं खुश हरदम रहता हूँ पर मुस्कान तुम्हारी अच्छी हैं मैं अपने उसूलों पर चलता हूँ पर ज़िद तुम्हारी अच्छी हैं मैं एक बेहतर शख्सियत हूँ , पर सीरत तुम्हारी अच्छी हैं मैं कितना भी कुछ कहता रहूँ पर हर …