कुछ जवाब तेरी-मेरी

रहने दे कुछ बाते….. यूँ ही अनकही सी.. . . . कुछ जवाब तेरी-मेरी … ख़ामोशी में अटके ही अच्छे हैं.

कोशिशे

ख्वाहिशे मेरी “अधुरी” ही सही पर .. . . . पर कोशिशे मै “पूरी” करता हुं….

थोडा इंतजार कर ए दिल

थोडा इंतजार कर ए दिल, . . . . उसे भी पता चल जाएगा की उसने खोया क्या है…

दरिया अगर सूख भी जाये

कैसे भूलेगी वो मेरी बरसोंकी चाहत को… . . . . दरिया अगर सूख भी जाये तो रेत से नमी नहीं जाती…

अंदाज तो बारिशों का लगाया जाता है

हमारा अंदाज कोई ना लगाए तो ही ठिक होगा,. . . . क्यूंकि अंदाज तो बारिशों का लगाया जाता है तूफ़ान का नहीं.

शीशे की तरह आर-पार हूँ

शीशे की तरह आर-पार हूँ . . . फिर भी बहुतों की समझ से बाहर हूं..!

लोग इसे मेरी मज़बूरी समझ बैठे

झुका हूँ तो कभी सिर्फ अपनों के लिए . . . और लोग इसे मेरी मज़बूरी समझ बैठे

रिश्तों से भरोसा

नजाकत तो देखिये, की सूखे पत्ते ने डाली से कहा .. . . . चुपके से अलग करना वरना लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा….

कितनी ऊँचाई पर खुदा रहता है

लौट आती है हर बार मेरी दुआ खाली, जाने कितनी ऊँचाई पर खुदा रहता है।

फायदा

फायदा सबसे गिरी हुई चीज़ है,. . . . . लोग उठाते ही रहते हैं।।