सुना है
तारीफ़ों के पुल के नीचे
मतलब की नदी बहती है ☺️
कचरे में पड़ी रोटियां
कचरे में पड़ी रोटियाँ रोज यह कहती है की पेट भरते ही इंसान अपनी औकात भुल जाता हैं
व्यक्तित्व
“व्यक्तित्व” की भी
अपनी वाणी होती है
जो “कलम”‘ या “जीभ”
के इस्तेमाल के बिना भी,
लोगों के “अंर्तमन” को छू जाती है..!!!
किसी से बस उतना ही दूर होना
किसी से बस उतना ही दूर होना की उसे आपकी अहमियत का एहसास हो जाए इतना भी दूर ना हो जाना की वो आप के बिना जीना सीख ले❗️
कोई ऐसा कर बहाना मेरी आस टूट जाए
तेरे वादों पे कहाँ तक मेरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मेरी आस टूट जाए
~फ़ना निज़ामी कानपुरी
उन की आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं
ला रहे हैं नींद के #आग़ोश में
अश्क़ मुझको थपकियां देते हुए…
नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है
उन की #आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं
जिंदगी नाव की मानिंद यूँ ही बस चलती रहे
जिंदगी नाव की मानिंद यूँ ही बस चलती रहे
मुहब्बत की आग प्यासे दिलों में जलती रहे
लहरें तो सदा #आग़ोश में लेने को मचलती है
कुछ दूर से ही नज़रों से ये नज़र मिलती रहे
पिता – बेटे के लिए हज़ारो सपने
#पिता
अर्थात एक जोड़ी वह आंख,
जिसकी पलकों में अंकुरते हैं बेटे को हर तरह से बड़ा करने के हजारों सपने..।।