तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ ~अहमद फ़राज़

दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था

दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था| तुम्हारे घर का सफ़र इस क़दर सख्त न था। इतने मसरूफ़ थे हम जाने के तैयारी में, खड़े थे तुम और तुम्हें देखने का वक्त न था। – गोपालदास नीरज

जिसको आना ही नहीं है

इंतजार भी उसका जिसे आना ही नहीं है…. प्यार भी उस से … जिसको कभी पाना ही नहीं है..!!😊

इन आँखों से भी जलन होती है मुझे

अब तो इन आँखों से भी जलन होती है मुझे… खुली हो तो ख्याल तेरे! बंद हो तो ख़्वाब तेरे!..

मुहब्बत के सिवा क्या देँगे….

उसने यह सोचकर अलविदा कह दिया…… गरीब लोग हैं, मुहब्बत के सिवा क्या देँगे…..!!

ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं

चलो अब जाने भी दो..क्या करोगे दासता सुनकर.., ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं,और बयां हमसे होगी नहीं…

ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती…

सुना है तुम्हारी एक निगाह से क़तल होते हैं लोग, एक नज़र हमको भी देख लो कि ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती…

मैँ गरीब था

क्या कमी थी मुझ मेँ.. जो तुमने मुझे छोड़ दिया.. वफ़ा करनी नहीँ आई या मैँ गरीब था.!!

नहीं मिला मुझे कोई तुम जैसा आज तलक

नहीं मिला मुझे कोई तुम जैसा आज तलक, पर ये सितम अलग है कि मिले तुम भी नहीं..!

नहीं मिला मुझे कोई तुम जैसा आज तलक

नहीं मिला मुझे कोई तुम जैसा आज तलक, पर ये सितम अलग है कि मिले तुम भी नहीं..!