फिर नींद से जाग कर आस-पास ढ़ूढ़ता हूँ तुम्हें…
क्यूँ ख्वाब मे इतने पास आ जाती हो तुम….
नहीं मिला मुझे कोई तुम जैसा आज तलक,
पर ये सितम अलग है कि मिले तुम भी नहीं..!
नहीं मिला मुझे कोई तुम जैसा आज तलक,
पर ये सितम अलग है कि मिले तुम भी नहीं..!
“कभी हमसे भी पूछ लिया करो हाल-ए-दिल,
कभी हम भी तो कह सकें दुआ है आपकी”
मुक्तलिफ है इश्क़ का गणित यारों
यहाँ तुम और मैं दो नहीं, एक होते हैं
चाशनी में डूबी दुनिया की मोहब्बतें एक तरफ़
मेरी तुम्हारी नीम सी कड़वी लड़ाइयाँ एक तरफ़
सलीका नक़ाब का भी
तुमने अजब कर रखा है।
जो आँखे हैं क़ातिल,
उन्हीं को खुला छोड़ रखा है।।