अक्टूबर बिछड़ने का महीना है

अक्टूबर बिछड़ने का महीना है, शाख़ से पत्ते अलग हुए जा रहे हैं, हवाओं के दिल भी भारी हो रखे हैं, पर अक्टूबर उम्मीद का महीना भी है कि नंगी टहनियां फ़िर से हरी होंगी, सब ख़त्म हो जाने के बाद भी कुछ होना बचा रहेगा.. और बचा रहेगा मेरा …

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा

मैं रुई पर एक कविता लिखूँगा और उसे तेल में डुबाकर दिया में सजाऊँगा फिर संसार के सबसे ऊंचे पर्वत पर जाकर मैं उस दीये को जलाऊँगा कविता में कुछ हो न हो उजाला जरूर होना चाहिए बस इतना उजाला जो अंधेरा हर सके। ~ देवेंद्र

वो बदल गये है

बात ये है कि वो बदल गये है . . . ज़ुल्म ये है कि मानते भी नहीं है…!! #बज़्म #शायरी

उन्ही चीजों का शौक है हमे

कुछ चीजें पैसों से नही मिलती . . . . बस उन्ही चीजों का शौक है हमे

स्पर्श बता देता है नीयत कैसी है

घमण्ड बता देता है कितना पैसा है । #मर्यादा बता देती है परिवार कैसा है ।। बोली बता देती है इंसान कैसा है । बहस बता देती है ज्ञान कैसा है ।। नजरें बता देती है सूरत कैसी है । स्पर्श बता देता है नीयत कैसी है ।। #बज़्म