ए नसीब ज़रा एक बात तो बता

ए नसीब ज़रा एक बात तो बता… . . . तू सबको आज़माता है या मुझसे ही दुश्मनी है!

घुटन क्या होती है

घुटन क्या चीज़ है, ये पूछिये उस बच्चे से . . . जो काम करता हैं “इक खिलोने की दुकान पर “

प्रेमिकाएँ पत्नियाँ होना चाहती रहीं

प्रेमिकाएँ पत्नियाँ होना चाहती रहीं… और पत्नियाँ प्रेमिकाएँ…. . . . कोई पुरुष किसी स्त्री को शायद पूरा मिला ही नहीं…

तकदीर

काश तकदीर भी होती किसी जुल्फ की तरह… . . . . जब जब बिखरती संवार लेते…

इस दुनिया में कुछ अच्छा रहने दो

इस दुनिया में कुछ अच्छा रहने दो . . . . बच्चों को बस, बच्चा रह ने दो …

सब्र इतना रखो की इश्क़ बेहूदा ना बने

सब्र इतना रखो की इश्क़ बेहूदा ना बने . . . खुदा मेहबूब बन जाए … पर महबूब खुदा ना बने

उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते

रहने दो “उधार” इक मुलाकात यूं ही..! . . . . सुना है “उधार” वालों को “लोग” “भुलाया” नहीं करते..!!

पलाश के फूलों कि तरह

एक ख़ूबसूरत पेड़ जिसपे खिले थे लाल मखमली खूबसूरत फूल इसे देख अचानक ठहर गयी नज़र क्योंकि नहीं थी उसपे हरी पत्तियाँ दमक रही थी सूखी डाल फूलों से तभी याद आयी तुम्हारी कही बात उम्मीद जीवन की कभी छूटने मत देना यूँ ही मुस्कुराते रहना हर लम्हा इन पलाश …

उद्दंड लड़के प्रेम में पड़कर शांत हो जाते हैं

कक्षा के सबसे उद्दंड लड़कों को कक्षा की सबसे शांत लड़कियों से प्रेम होता है सबसे शांत लड़कियाँ प्रेम में पड़कर उद्दंड हो जाती हैं सबसे उद्दंड लड़के प्रेम में पड़कर शांत हो जाते हैं ~ देवेंद्र दांगी

अक्टूबर बिछड़ने का महीना है

अक्टूबर बिछड़ने का महीना है, शाख़ से पत्ते अलग हुए जा रहे हैं, हवाओं के दिल भी भारी हो रखे हैं, पर अक्टूबर उम्मीद का महीना भी है कि नंगी टहनियां फ़िर से हरी होंगी, सब ख़त्म हो जाने के बाद भी कुछ होना बचा रहेगा.. और बचा रहेगा मेरा …